स्वतंत्रता सेनानियों का स्मरण : सत्येन्द्र छिब्बर

साहित्य जगत
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हमारे  मोहयाल स्वतंत्रता सेनानियों ने धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर भारत माता को अंग्रेजी दासता से मुक्त कराने का जो लक्ष्य रखा और उसी का यह परिणाम है कि 15 अगस्त 1947 को भारत देश आज़ाद हो गया। हम गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस पर जगह-जगह तिरंगा झंडा फहराते हैं लेकिन हम आज़ादी के दीवानों के त्याग व बलिदान को भूलते जा रहे हैं। देश की स्वतंत्रता के लिए सेनानियों के संघर्ष व बलिदान के बारे में आज की पीढ़ी को स्मरण कराना बहुत ज़रूरी है।

हमारे स्वतंत्रता सेनानी मानव की पूर्ण स्वतंत्रता, व्यक्ति की गरिमा और प्रभावशाली जीवन दृष्टि के लिए संघर्ष करने वाले जुझारू व्यक्ति के रूप में सदैव याद किए जाएंगे। जिन आदर्शों के लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया, उसे हमें हमेशा याद रखना होगा। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं महत्वपूर्ण जगहों पर लगानी चाहिए ताकि नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती रहे। उन्होंने देश की आज़ादी के लिए संघर्ष किया, पीड़ा झेली व आज़ादी के बाद उन्होंने देश के विकास के लिए प्रयास किए, परंतु उनको भुला दिया गया है।

स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा बताए गए रास्ते पर चलने का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

हमारे स्वतंत्रता सेनानियों में यह स्वाभाविक गुण था कि उन्होंने अपने राजनीतिक मतभेद के बावजूद आपस में मतभेद नहीं होने दिया। उनका विराट व्यक्तित्व प्रेरणादायक है। राष्ट्र की स्वतंत्रता की रक्षा करना और उनके बताए गए रास्तों को जन-जन तक पहुँचाना आज सबसे बड़ा आवश्यक कार्य है। इसके लिए युवा भावी पीढ़ी को समर्पण की भावना से कार्य करना और उनके किए गए कार्यों व उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सत्येन्द्र छिब्बर जोधपुर

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