वृंदावन और हरिद्वार के मोहयाल आश्रम बने श्रद्धा और अनुशासन का अद्भुत केंद्र

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वृंदावन और हरिद्वार में मोहयाल आश्रम — सेवा, अनुशासन और श्रद्धा की मिसाल”

वृंदावन/हरिद्वार, प्रतिनिधि विशेष:
भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीला स्थली वृंदावन और देवभूमि हरिद्वार में स्थित मोहयाल आश्रम आज न केवल मोहयाल समुदाय, बल्कि समस्त यात्रियों के लिए अनुशासन, सेवा और श्रद्धा का जीवंत उदाहरण बन चुके हैं।
साफ-सुथरे कमरों, श्रेष्ठ व्यवस्थाओं और सात्विक भोजन की सुविधा ने इन आश्रमों को देशभर के तीर्थ यात्रियों की पहली पसंद बना दिया है।

मोहयाल आश्रमों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुबह, दोपहर और रात्रि तीनों समय स्वादिष्ट एवं सात्विक भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है।
दस वर्ष तक के बच्चों के लिए भी भोजन निःशुल्क है।
स्वच्छ, सुसज्जित कमरे और शांत वातावरण यात्रियों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं।

मोहयाल आश्रम, मोहयाल समुदाय की सामूहिक निष्ठा, सेवा और सहयोग भावना से निर्मित हुए हैं।
आश्रमों के रखरखाव और संचालन के लिए निरंतर आर्थिक सहयोग आवश्यक है।
प्रबंधन समिति ने समुदाय के सभी सदस्यों से अनुरोध किया है कि वे नियमों का पालन करते हुए आश्रम की गरिमा और अनुशासन बनाए रखें।

जीएमएस मैनेजिंग कमेटी द्वारा बनाएं गए महत्वपूर्ण नियम, नियमों के अनुसार:-

मोहयाल जाति से संबंधित व्यक्ति और उनकी बेटियाँ, जो अन्य जाति में विवाहित हैं, उन्हें कमरें के किराए में 50% की छूट और गैर-मोहयाल यात्रियों को यह छूट नहीं होगी ।

अतिरिक्त गद्दे के लिए कमरे के आधे किराए का शुल्क लिया जाएगा।

छूट के दुरुपयोग पर चेतावनी और ID Proof अनिवार्य

हाल के दिनों में कुछ यात्रियों द्वारा अपने गैर-मोहयाल मित्रों या रिश्तेदारों को साथ लाकर अनुचित छूट लेने की शिकायतें मिली हैं।
जब कर्मचारियों द्वारा पहचान पत्र मांगा जाता है, तो कुछ लोग अभद्र व्यवहार तक कर बैठते हैं।

पुलिस और पर्यटन विभाग की ओर से इस विषय में स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं —

“सभी होटल, धर्मशाला और आश्रम प्रत्येक यात्री से वैध पहचान पत्र (ID Proof) अनिवार्य रूप से लें। आदेश की अवहेलना पर संस्था के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।”

“आश्रम हमारी धरोहर, अनुशासन हमारी पहचान”

जीएमएस के उपाध्यक्ष श्री योगेश मेहता ने कहा है कि कुछ व्यक्तियों का अनुचित व्यवहार पूरे मोहयाल समुदाय की छवि को प्रभावित करता है।
स्थानीय सभाओं तक ऐसी घटनाओं की चर्चा पहुँच जाना अत्यंत खेदजनक है।
समाज के प्रत्येक सदस्य का दायित्व है कि वह आश्रम की गरिमा बनाए रखे।

भक्ति, मर्यादा और शांति का संदेश

मोहयाल आश्रमों का उद्देश्य केवल आवास या भोजन की सुविधा देना नहीं, बल्कि आगंतुकों को संस्कार, संयम और भक्ति का वातावरण प्रदान करना है।
तीर्थस्थल आत्मिक शांति, सहनशीलता और अनुशासन के प्रतीक होते हैं — यही भावना मोहयाल आश्रम की आत्मा है।

प्रबंधन की अपील

प्रबंधन समिति ने सभी श्रद्धालुओं और मोहयाल परिवारों से भावपूर्ण अपील की है —

> “मोहयाल आश्रम हमारी पहचान है — इसे अनुशासन, मर्यादा और सेवा से ऊँचा रखें।”

(संवाददाता — मोहयाल मित्रम् न्यूज़ डेस्क)

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