पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय भाई महावीर जी की जयंती 30 अक्तूबर पर विशेष लेख विशेष।

मोहयाल शख्सियत मोहयाल समाचार
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लेखक: गोपाल कृष्ण छिब्बर

(लेखक: श्री गोपाल कृष्ण छिब्बर वरिष्ठ अधिवक्ता और पत्रकारिता के साथ साथ समाजिक एवं धार्मिक कार्यों में विशेष पहचान स्थापित किए हुए हैं। यह यादगार पल उस समय का है जब 50वीं मोहयाल कांफ्रेंस 2003 में भोपाल में संपन्न हुई। भाई महावीर मध्यप्रदेश के राज्यपाल थे। मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित हुए। भोपाल मोहयाल सभा के सचिव रहते हुए श्री गोपाल कृष्ण छिब्बर ने कांफ्रेंस में अहम भूमिका निभाई)

बलिदानी पूर्वजों के वंशज थे शिक्षाविद भाई महावीर।

यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य था कि राजभवन में ऐसा शिक्षाविद ओर बलिदानी पूर्वजों का वंशज नियुक्त हुआ जिससे राजभवन की ही शोभा बढ़ गई।
उनके पूर्वज भाई मतिदास को 9 नवम्बर 1675 की दिल्ली के चांदनी को में मुगल सम्राट औरंगजेब ने इस्लाम धर्म स्वीकार न करने पर आरे से चिरवा दिया था भाई मतिदास सिख गुरु तेग बहादुर के प्रधान मंत्री थे उनका स्मारक गुरुद्वारा शीशगंज के साथ आज भी स्थापित है ।
भाई महावीर जी के रिश्ते में चाचा क्रांतिकारी भाई बालमुकुंद को 8 मई 1914 को ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड हार्डिग पर बम फेंकने पर दिल्ली में फांसी की सजा दी गई थी।
भाई महावीर के पिता भाई परमानंद को क्रांतिकारियों का महागुरु कहा जाती हैं उन्हें भी लाहौर षड्यंत्र प्रकरण में फांसी की सजा हुई थी जिसे बाद में अंडमान जेल में आजन्म कारावास में बदल दिया था।
भाई महावीर जब 10 वर्ष के थे उनकी माताजी का निधन हो गया था उनका प्रारंभिक जीवन कष्टमय गुजरा लेकिन कुशाग्र बुद्धि के कारण 1946 में ही पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर से अर्थशास्त्र में स्नाकोत्तर की डिग्री प्राप्त की ली थी ओर अध्यापन कार्य प्रारंभ किया था कि भारत का विभाजन हो गया ।
8 दिसम्बर 1947 को क्रांतिकारी पिता भाई परमानंद का निधन हो गया ।पहले दयाल सिंग कॉलेज करनाक में अध्यापन कार्य किया फिर दिल्ली आ गईं और प्राध्यापक हो गए लखनऊ विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की दिल्ली विश्वविद्यालय से विधि को डिग्री भी प्राप्त की ओर शिक्षण को ही कार्यक्षेत्र बनाया। जनसंघ के संस्थापन के समय से सक्रिय सदस्य थे उनकी कार्यकुशलता ओर प्रतिभा के कारण वे दो बार राज्यसभा के सांसद बनाए गए आर्थिक नीतियों में उनकी अच्छी पकड़ थी संसद में वे मुखर वक्ता रहे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा जी भी उनके भाषणों से स्पष्टवादिता से प्रभावित होती थीं।
अटलजी की सरकार ने सत्ता में आते ही भाई महावीर जी की प्रतिभा के कारण 22 अप्रैल 1998 को मध्यप्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया ओर राज्यपाल के पद को कुशलता से निभाया वे मात्र रबर स्टाम्प नहीं थे।
भाई महावीर जी ने विश्व विद्यालयों का ऑडिट कराया 1999 ने 11 करोड़ रुपयों की अनियमितताएं का पर्दाफाश हुआ अवैध नियुक्तियों पर रोक लगाई ।

उन्होंने मंत्री के जमीन घोटाले के प्रकरण में दिग्विजय सिंह सरकार की अभियोजन की स्वीकृति न दिए जाने के विरूद्ध अभियोजन की स्वीकृति दी थी जिसे मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया था परन्तु सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने राज्यपाल भाई महावीर के अभियोजन के निर्णय की सही माना ओर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय को निरस्त कर दिया जो न्यायिक इतिहास की एकमात्र मिसाल है ।
भाई महावीर ने कई पुस्तकें लिखी और देश के सभी हिंदी अंग्रेजी समाचारपत्रों में उनके हजारों लेख प्रकाशित होते रहते थे।
सादगी सहजता सरलता और निर्भीकता उनके गुण थे ऐसे राष्ट्रवादी निष्ठावान ओर बलिदानी पूर्वजों के वंशज आज के राजनैतिक परिदृश्य में दिखाए नहीं देते।

कुछ यादगार पल:

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