जालंधर ( 14 फरवरी2026) – देशसेवा, खेल भावना और पारिवारिक संस्कारों की समृद्ध विरासत को अपने जीवन में साकार करने वाले सीमा सुरक्षा बल (BSF) के डीआईजी (सेवानिवृत्त) सुनील मोहन मेहता आज जालंधर में निवास करते हुए युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। मूल रूप से हरियाणा के कुरुक्षेत्र से संबंध रखने वाले सुनील मोहन मेहता ऐसे परिवार में जन्मे, जहां अनुशासन, देशभक्ति और मोहयाल परंपराओं के संस्कार पीढ़ियों से जीवन का हिस्सा रहे हैं।
9 मार्च 1959 को एक सैनिक परिवार में जन्मे सुनील मोहन मेहता बचपन से ही अनुशासन और राष्ट्रप्रेम के वातावरण में पले-बढ़े। खेलों के प्रति विशेष रुचि के कारण उन्होंने अपनी शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक के रूप में पूरी की और इसके बाद राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला से हॉकी कोचिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया।
एक प्रतिभाशाली हॉकी खिलाड़ी के रूप में उन्होंने भारतीय हॉकी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव दिलाया। भारतीय टीम के गोलकीपर के रूप में उन्होंने मलेशिया और श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय दौरों में हिस्सा लिया और अपने शानदार खेल से सबका ध्यान आकर्षित किया। इसके अतिरिक्त भारत में जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, हॉलैंड, फ्रांस, कनाडा और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों के विरुद्ध खेले गए मुकाबलों में भी उन्होंने भारतीय टीम की ओर से प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने डीईएमयू, नॉर्दर्न रेलवे और सीमा सुरक्षा बल की टीमों का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी खेल प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। खेल के साथ-साथ उन्होंने अपने परिवार की देशसेवा की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सीमा सुरक्षा बल में 39 वर्षो की सेवा के बाद मार्च 2019 में डीआईजी के पद से सेवानिवृत्ति ले ली।
सेवानिवृत्ति के बाद भी सुनील मोहन मेहता सक्रिय और स्वस्थ जीवन जीते हुए समाज और युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि खेल और देशसेवा दोनों क्षेत्रों में समर्पण, अनुशासन और मेहनत से उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है।
विरासत में मिली देशभक्ति और सेवा भावना
सुनील मोहन मेहता का परिवार लंबे समय से देशसेवा और सामाजिक मूल्यों के लिए जाना जाता है। उनके स्वर्गीय दादाजी सुबेदार देवी दास मेहता प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल रहे। उन्होंने कुरुक्षेत्र में सादगी, ईमानदारी और सम्मानपूर्ण जीवन जीते हुए अपने बच्चों को उच्च शिक्षा और श्रेष्ठ संस्कार दिए।
पिता स्वर्गीय श्री इकबाल मोहन मेहता भारतीय सेना में सेवाएं देने के साथ-साथ एक संवेदनशील लेखक भी थे। उनकी मोहयाल समाज और मोहयालियत को समर्पित रचनाएं समय-समय पर ‘मोहयाल मित्र’ पत्रिका में प्रकाशित होती रहती थीं।
परिवार के अन्य सदस्यों ने भी विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। चाचा रणबीर मोहन मेहता टेलीकॉम विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद कई वर्षों तक जनरल मोहयाल सभा (GMS) के इंद्रपुरी स्थित मुख्यालय में प्रबंधक रहे। वहीं पृथ्वीराज मोहन आईटीबीपी से कमांडेंट पद से सेवानिवृत्त होकर मोहयाल सभा अंबाला कैंट में लंबे समय तक पदाधिकारी रहे, जबकि बलबीर मेहता सीआईएसएफ से कमांडेंट के पद से सेवानिवृत्त होकर कुरुक्षेत्र में निवास कर रहे हैं।
नई पीढ़ी भी बढ़ा रही गौरव
परिवार की नई पीढ़ी भी इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रही है। सुनील मोहन मेहता के पुत्र सुशांत मोहन एयर कनाडा में पायलट है । पुत्री शिवानी मोहन सिंगापुर में योग प्रशिक्षक के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
इसके अतिरिक्त उनके बड़े भाई योगाचार्य हरीश मोहन ने भी सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। 1990 के दशक में उन्होंने यूथ मोहयाल सभा और मोहयाल सभा फरीदाबाद में सक्रिय रहें उनके द्वारा मोहयाल मित्र में प्रकाशित लेख और कविताएं युवाओं को मोहयालियत से जोड़ने की प्रेरणा देती। मोहयाल सभा फरीदाबाद को संगठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सुनील मोहन मेहता और उनका परिवार इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब पारिवारिक संस्कार, देशभक्ति और समाज सेवा की भावना एक साथ मिलती है तो वे पीढ़ियों तक प्रेरणा देने वाली विरासत बन जाती है। उनके जीवन की उपलब्धियां खेल, देशसेवा और सामाजिक मूल्यों के संगम की एक प्रेरक कहानी प्रस्तुत करती हैं।
प्रस्तुति: अशोक दत्ता सचिव जालंधर मोहयाल सभा।


