आस्था, सेवा और संगठन का संगम: पीके दत्ता की धार्मिक यात्रा

मोहयाल समाचार
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मोहयाल रत्न श्री पीके दत्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष (GMS) की धार्मिक आस्था से ओतप्रोत यात्रा 23 जनवरी को पवित्र नगरी अमृतसर से आरंभ होकर 24 जनवरी को चंडीगढ़ में संपन्न हुई। चंडीगढ़ से वे हवाई मार्ग द्वारा अपने गृहनगर दिल्ली के लिए रवाना हुए। इस संपूर्ण यात्रा में जीएमएस के पीआरओ श्री राजकुमार बख्शी जी ने अगुवाई की।

यात्रा के प्रथम चरण में 23 जनवरी की सुबह श्री दत्ता सबसे पहले पंडोरी स्थित बावा लाल दयाल जी महाराज की पावन नगरी श्री ध्यानपुर धाम पहुंचे और श्रद्धापूर्वक नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

इसके पश्चात वे गुरदासपुर जिले के गांव जप्पूवाल पहुंचे, जहां मोहन जाति के जठेरे माता अंबा बेली जी की समाधि पर शीश नवाया। यहां उनकी मुलाकात इस पवित्र स्थल की देखरेख कर रहे श्री राकेश मोहन से हुई। स.दीदार सिंह मोहन, विक्की मोहन और बंटी मोहन ने दत्ता जी का स्वागत किया और भारी बरसात में समाधि स्थल के लेकर गए । दत्ता जी ने नतमस्तक होकर मां अंबा बेली का आर्शीवाद प्राप्त किया। बरसात के बावजूद श्रद्धा में कोई कमी नहीं दिखी।

कुछ समय बाद श्री दत्ता गुरदासपुर स्थित बाबा ठक्कर जी महाराज (दत्ता जाति के जठेरे) के मंदिर पहुंचे। लगातार हो रही बारिश के बीच उन्होंने गहरी आस्था के साथ बाबा जी की समाधि पर नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया और उपस्थित मोहयाल समुदाय के सदस्यों से आत्मीय भेंट की।


इसके उपरांत यात्रा जालंधर की ओर बढ़ी, जहां वे शाम छह बजे नवनिर्मित मोहयाल भवन पहुंचे। यहां जालंधर मोहयाल सभा द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। भवन का अवलोकन करते हुए श्री दत्ता ने प्रसन्नता व्यक्त की और भवन-निर्माण की आगामी कार्ययोजनाओं में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। सभा के सदस्यों में उनसे मिलकर विशेष उत्साह और खुशी देखी गई।
रात्रि विश्राम जालंधर में करने के बाद अगली सुबह श्री दत्ता होशियारपुर मोहयाल सभा द्वारा आयोजित परिवार मिलन कार्यक्रम में शामिल हुए।

वहां से वे चंडीगढ़ पहुंचे जहां मोहयाल सभा मोहाली के प्रधान श्री वीके वैद की की टीम से भेंट की । दत्ता जी का गर्मजोशी के साथ जय मोहयाल के उद्घोष से स्वागत किया गया। भगवान परशुराम जी का चित्र और सिरोपा भेंट किया गया।  यहां से दत्ता जी ने दिल्ली के लिए प्रस्थान किया।
श्री पीके दत्ता ने इस संपूर्ण यात्रा को आस्था, अपनत्व और संगठनात्मक ऊर्जा से भरा सुखद अनुभव बताया।
यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था की मिसाल बनी, बल्कि मोहयाल समाज की एकता और सेवा भाव को भी सशक्त करती दिखाई दी।

प्रस्तुति: अशोक दत्ता

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