स्वर्गीय श्रीमती बिमला बाली (धर्मपत्नी स्वर्गीय श्री आशचर्ज लाल बाली नंबरदार) की दसवीं पुण्यतिथि के अवसर पर बाली परिवार द्वारा माताजी को श्रद्धा एवं सम्मान के साथ नमन किया गया। स्वर्गीय श्रीमती बिमला बाली आज से दस वर्ष पूर्व 1 जनवरी 2016 को परलोक सिधार गई थीं।
माताजी अपने सुसंस्कारों, सरल स्वभाव और पारिवारिक मूल्यों के लिए सदैव स्मरणीय रहेंगी। उन्होंने अपने बच्चों को उच्च कोटि के संस्कार प्रदान किए, जिनका प्रभाव आज भी परिवार के आचरण में स्पष्ट दिखाई देता है।
आज उनके सुपुत्र हर्ष बाली एवं पुत्रवधू स्नेह बाली, सुपुत्र सुनील कुमार बाली नंबरदार एवं पुत्रवधू रमा बाली तथा पौत्र प्रतीक बाली एवं वासू बाली परिवार की गरिमा और परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए समाज में सकारात्मक योगदान दे रहे हैं। बाली परिवार मोहयाल समाज के सुख-दुख में सदैव अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
माताजी की पावन स्मृति में बाली परिवार की ओर से जालंधर मोहयाल सभा को ₹2100 की राशि दान स्वरूप भेंट की गई, जो उनके समाजसेवी और धार्मिक संस्कारों का प्रतीक है।
उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय श्रीमती बिमला बाली कंजरूड दत्ता के प्रतिष्ठित परिवार से थीं, जबकि उनके पति स्वर्गीय श्री आशचर्ज लाल बाली मूल रूप से गुजरात के डींग से थे, जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है।
पुण्यतिथि पर उपस्थित परिजनों ने माताजी की स्मृतियों को नमन करते हुए उनके द्वारा दिए गए संस्कारों पर चलने का संकल्प लिया।


