मोहयाल रत्न — बीस वर्षों बाद भी समाज के गौरव की अमर गाथा

मोहयाल शख्सियत
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आज से बीस वर्ष पूर्व लिखी गई “मोहयाल रत्न” पुस्तक, मोहयाल समाज के गौरवशाली इतिहास की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक के लेखक इंस्पेक्टर पुष्प बाली, जो पंजाब पुलिस में अपने कर्तव्यनिष्ठा, बहादुरी और बहुमुखी व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं, ने अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर समाज के महान मोहयाल विभूतियों के जीवन और योगदान को अमर शब्दों में पिरोया।

पुष्प बाली की यह कृति केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनके समर्पण, अनुसंधान और लेखन के प्रति जुनून का प्रतीक है। उनकी बहादुरी और सेवा भाव की लंबी सूची के साथ-साथ, यह साहित्यिक योगदान भी मोहयाल समाज के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।

“मोहयाल रत्न” का प्रकाशन उस युग का साक्षी है जब समाज के गौरवशाली अतीत को संजोने का प्रयास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। इस पुस्तक के माध्यम से हमारी भावी पीढ़ी अपने पूर्वजों के धर्म, देश और समुदाय के प्रति किए गए योगदान से परिचित होगी और गर्व का अनुभव करेगी।

विशेष उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक में प्रकाशित सभी लेख अब “मोहयाल मित्रम्” पत्रिका में श्रृंखलाबद्ध रूप से प्रकाशित किए जाएंगे, ताकि यह अमूल्य धरोहर हर पाठक तक पहुँचे और समाज के स्वर्णिम इतिहास की गूंज फिर से जीवंत हो उठे।

अशोक दत्ता, सचिव जालंधर मोहयाल सभा।

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