आज चाँद पर हम है जा पहुंचे, जो तमन्ना थी दिल में कब से: संदीप छिब्बर

साहित्य जगत
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जयहिन्द जय विज्ञान निकल रहा, बारबार हम सबके लब से
आज चाँद पर हम है जा पहुंचे, जो तमन्ना थी दिल में कब से
पहली बधाई भारत देश को जिसने यह इतिहास है बनाया
दूसरी बधाई साइंटिस्ट्स को जिन्होंने ये संभव कर दिखाया
तीसरी बधाई इस अभियान में जुड़े सब कर्मचारियों को भी
एक बधाई मोदी जी को भी जिन्होंने इसको लक्ष्य था बनाया
बढ़ाते रहे लगातार होंसला, पिछली बार चूके थे हम तब से
आज चाँद पर हम है जा पहुंचे, जो तमन्ना थी दिल में कब से

देख भारत की ऐसी कामयाबी सारी दुनिया यह हिल गई है
शिक्षा विज्ञान और अनुसंधान को इक नई दिशा मिल गई है
जो करते थे शक उन इबारतों पे जो रोज़ भारत लिख रहा है
अब उन सब नफरत फ़ैलाने वालो की ज़ुबानें ही सिल गई है
रहे भारत सदा हर क्षेत्र में आगे, बस यही इक दुआ है रब से
आज चाँद पर हम है जा पहुंचे, जो तमन्ना थी दिल में कब से

हुआ साबित पूरे हैं हो जाते जो सपने खुली आँखों से हो पाले
कोई उन्हें समझे और सहेजे फिर लगन से हकीकत में ढाले
और अब दिल को भी होने लगा है विश्वास उम्मीद तसल्ली
यह मेरा देश और आगे बढ़ेगा, है अब ये सही हाथो के हवाले
अब बस भारत का नाम होगा, इस धरा से लेके उस नभ तक
आज चाँद पर हम है जा पहुंचे, जो तमन्ना थी दिल में कब से

जयहिन्द जय विज्ञान निकल रहा, बारबार हम सबके लब से
आज चाँद पर हम है जा पहुंचे, जो तमन्ना थी दिल में कब से

                                                                                                                                   संदीप छिब्बर

 

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