साहित्य बच्चों को संस्कारित करने के साथ संवेदनशील भी बनाता है: चौहान

साहित्य जगत
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जोधपुर, 26 मई। ‘पूज्यना कला, संस्कृति, शिक्षा विमर्श मंच’ द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में साहित्यकार सत्येंद्र छिब्बर के बाल कथा संग्रह ‘बनीचे से हलचल’ और हाइकु संग्रह ‘मन बंजारा’ का लोकार्पण हुआ। इसी अवसर पर डॉ. प्रतापसिंह भाटी को साहित्य और चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सुभाष चौहान ने कहा कि साहित्य बच्चों को संस्कारवान बनाता है और उन्हें संवेदनहीनता से भी बचाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को नैतिकता और संवेदना से जोड़ने वाली कहानियों की अत्यंत आवश्यकता है।

लेखक सत्येंद्र छिब्बर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बाल साहित्य में ऐसी कहानियां होनी चाहिए जो बच्चों को नैतिक शिक्षा दे सकें। उन्होंने बताया कि कैसे पहले पंचतंत्र की कहानियों के माध्यम से बच्चों को नैतिक संदेश दिए जाते थे और यह परंपरा आज भी प्रासंगिक है।

मुख्य अतिथि कैलाश कौशल ने हाइकु विधा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जापानी शैली की कविता है जिसे सबसे पहले 1916 में रवींद्रनाथ टैगोर ने भारत में बंगाली भाषा में लिखा था।

जोधपुर हाइकु मंच के संयोजक डॉ. सुरेन्द्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि हाइकु लेखन सरल प्रतीत होता है, लेकिन इसके पीछे गहन अनुभूति और भाव होते हैं।

इस अवसर पर पधारे विशिष्ट अतिथियों में रमेश राव, डॉ. गिरिराजसिंह सिद्धू, महावीर मुद्गल, अर्चना शर्मा, अनुपमा शर्मा, सुशीला शर्मा, मनीष डागा, राकेश सिंह, माया, अम्बा, अंशु आदि शामिल रहे।

कार्यक्रम का संचालन आशा व्यास ने किया और धन्यवाद ज्ञापन रमेश राव ने किया।

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