सतीश कुमार छिब्बर द्वारा ज़िंदगी के खट्टे मीठे अनुभवों पर लिखी पुस्तक “स्वीट, बिटर, सोर” वैश्विक स्तर पर सराहना बटोर रही है। इस पुस्तक में लेखक सतीश कुमार छिब्बर ने अपने जीवन में हुई सभी महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण विस्तार से दिया है। सात साल की उम्र में विभाजन की त्रासदी झेलने और अपने परिवार के लगभग सभी सदस्यों के मीरपुर में हुये कत्लेआम के भयानक हृदय विदारक सदमें से उभरने और ज़िंदगी में हुए विभिन्न संघर्षो का उल्लेख उन्होंने बड़े ही भावपूर्ण और खुले शब्दों से किया है। कैसे भारत के विभिन्न शहरों में ज़िंदगी जीने और आगे बढ़ने में उन्होंने और उनके बड़े भाई सुदर्शन छिब्बर ने इक दूजे का साहस बंधाया और कभी एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा, वो पढ़ना सच में प्रेरणा दायक है। अपने तीनो बच्चों संदीप, सचिन और मीनाक्षी को उच्च शिक्षा दिलाने और संस्कारवान बनाने में उनकी पत्नी स्वर्गीय पुष्पा छिब्बर ने जिस जी जान से मेहनत की और कठिन परस्थितियों में रहते हुए भी कभी शिकायत नहीं की, वो सच में सराहनीय है। मीरपुर (पी.ओ.के) में जन्म ले कर, अमृतसर, धर्मशाला, जमशेदपुर, बिलासपुर, अम्बाला, सहारनपुर, जालंधर जैसे शहरों में रहने से लेकर अमेरिका और कनाडा के विभिन्न शहरों की यात्रा करना सच में अद्भुत है। अभी अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में सैन होज़े में अपने छोटे बेटे सचिन छिब्बर के पास रहते हुए, कूल्हे की हड्डी में हुए फ्रैक्चर के इलाज़ दौरान उन्होंने यह किताब लिख कर सच में उन्होंने अपने अंदर छुपी असीम लेखन की प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। 85 साल की उम्र में भी अपने जन्म से लेकर अब तक हुई छोटी छोटी घटनायों को भी याद रखना और उन्होंने सटीक और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत करना दिल लो छू जाता है। सतीश कुमार छिब्बर और उनके बड़े बेटे संदीप छिब्बर जालंधर मोहयाल सभा के सक्रिय सदस्य है। मोहयाल मित्रम की टीम की तरफ से समस्त छिब्बर परिवार को इस पुस्तक के प्रकाशन पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें। यह पुस्तक अमेज़न पर बिक्री और पढ़ने के लिए उपलब्ध है।



