“Sky is not the limit” — यह शब्द उस वीर वायु-योद्धा के हैं, जिन्होंने भारतीय वायु सेना में 25 वर्षों तक अद्वितीय साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ सेवा दी।
विंग कमांडर विपिन विलास ताकवाले, जिन्हें उनकी वीरता के लिए वायु सेना मेडल (Gallantry) से सम्मानित किया गया, ने 15 जनवरी 2026 को स्वेच्छा से भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्ति ली।
अपने गौरवपूर्ण कार्यकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएँ दीं। विशेष रूप से केदारनाथ आपदा के समय उनका योगदान अविस्मरणीय रहा। उन्हें केदारनाथ से गौचर एयरफील्ड तक तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अत्यंत कठिन और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में उन्होंने अपने हेलीकॉप्टर से एक ही दिन में 90 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला।
इसी दौरान एक अन्य हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें फंसे पायलट का जीवन भी उन्होंने साहसिक प्रयास से बचाया। विपरीत परिस्थितियों में दिखाए गए अद्भुत पराक्रम और सेवा-भाव के लिए उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा वायु सेना मेडल से अलंकृत किया गया।
उनकी सफलता के पीछे उनकी धर्मपत्नी विंग कमांडर भावना दत्ता (मोहयाल सभा के प्रधान श्री डी.एन. दत्ता जी की सुपुत्री) का निरंतर सहयोग और प्रेरणा भी प्रेरणादायी रही है। उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया।
सेवा निवृत्ति के अगले ही दिन विंग कमांडर विपिन विलास ताकवाले ने पुणे की एक प्रतिष्ठित कंपनी में सिविल पायलट के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली। वहीं विंग कमांडर भावना दत्ता को एन.डी.ए. खडकवासला में प्रशिक्षक (Instructor) के रूप में नई नियुक्ति मिली है।
मोहयाल सभा प्रेम नगर इस वीर दंपति को उनके नए दायित्वों के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ देती है।
प्रस्तुति : सचिव संतोष बाली : मोहयाल सभा प्रेम नगर देहरादून।


